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27/03/2025 Kajal sah Development Views 103 Comments 0 Analytics Video Hindi DMCA Add Favorite Copy Link
खोना एवं बदले

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है अर्थात् किसी भी लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए उन सभी आदतों एवं सुविधाओं को त्यागना चाहिए,जो लक्ष्य की राह में बाधक बन रही है। कहते हैं न जिसने अंधेरा न देखा हो उसके लिए उजाले क्या महत्व होता है ?स्वयं को सम्पूर्ण रूप से लक्ष्य के प्रति समर्पित करना अत्यंत आवश्यक है। जितना बड़ा लक्ष्य है,उतना बड़ा ही संघर्ष करना जरूरी है अर्थात् पग– पग पर कठिनाइयां आयेगी लेकिन उन दर्दों से हमें नहीं घबराना नहीं चाहिए।आज एक महत्वपूर्ण विषय पर मैं निबंध लिख रही हूं,जिसका शीर्षक है – "दर्द से भागे नहीं,उसे अपनाएं" 1.अनिवार्य:जिस प्रकार रात के बाद सुबह का आना तय है उसी प्रकार सुख और दुख भी जीवन का हिस्सा है। दुख के बाद सुख का आना भी तय है लेकिन उस दुख के क्षणों में धैर्य से कार्य करना सबसे जरूरी होता है। दर्द हमारे जीवन का हिस्सा है।दर्द से हमें भागना नहीं चाहिए,क्योंकि लक्ष्य प्राप्ति के दौरान दर्द का सामान्य बात है।उन चीजों को अगर आपको त्यागना पड़ रहा है,जो आपको प्रिय है लेकिन साथ ही साथ वह आपके लिए बाधक भी बन रहा है।तब उसे त्याग कीजिए।दर्द होगा लेकिन यह दर्द भविष्य में हर्ष के रूप में बदल सकता है। 2. मजबूती: अधिक आरामदायक जीवन मन एवं तन को कमजोर कर देती है।इसलिए अत्यधिक आरामदायक जीवन भी उचित नहीं है ।यही कारण है कि आज लोग जल्दी बीमार,शारीरिक रूप से कमजोर एवं मानसिक रूप कमजोर जो रहे हैं,क्योंकि आज मनुष्य अपना काम स्वयं से नहीं करता।वैज्ञानिक उपकरणों ,ऑनलाइन ऐप्स पर निर्भर है।इसलिए आज के लोगों को यह पता ही नहीं है कि दर्द किसे कहते हैं? इसलिए आज से ऐसे कार्यों को जिसे करने में आपको तन और मन दोनों का उपयोग करना पड़े। जैसे : घर का काम करना सीखें और अधिक उपकरणों का उपयोग न करें,chatgpt से हर कार्य न करें , किताबों का अध्ययन करें एवं खुद से अपना सारा नोट्स एवं homework करें इत्यादि।आरंभ यह आपके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है और आपको दर्द भी होगा।लेकिन यह दर्द समग्र रूप से अर्थात मानसिक,शारीरिक एवं भावनात्मक रूप से मजबूत बनायेगी। आलस्य एवं काम को टालने की आदत भी दूर हो जायेगी। 3. बदलाव: हर बदलाव या सफलता दर्द के बाद ही आती है अर्थात् संघर्ष करने के बाद ही ।मान लीजिए आप मोटे हैं और आप एक फिट बॉडी बनाना चाहते हैं। फैट बॉडी से फिट बॉडी बनाने के लिए दर्द आपको सहना होगा अर्थात जिम में जाकर आपको पसीना बहाना होगा।अगर आप आज दर्द ही सहना नहीं चाहते हैं,तब बदलाव या सफलता मिलना कतई संभव नहीं है । 4. अनुभव एवं समाधान:अगर समस्या है,तो उसका समाधान भी।लेकिन जीवन में छोटी–छोटी समस्याओं से हम घबरा जाते हैं और हार मानने लगते है।समस्या से भागना उचित नहीं है,क्योंकि वह फिर फिर भविष्य में विशाल समस्या बनकर वापस आ सकती है। इसीलिए अगर समाधान करने में दर्द सहना भी पड़े तो हमें दर्द सहना चाहिए,उसे भागना उचित नहीं है।हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि समस्या है तो उसका समाधान भी। वृद्ध लोग कहते हैं कि यह बाल धूप से सफेद नहीं हुए है। उनलोगों जीवन में हर्ष एवं दर्द दोनों को देखा होगा।जो बातें हमें किताबें नहीं सिखा सकती,वे हमें जीवन में कठिन अनुभव सिखाते हैं।दर्द भी एक शिक्षक की भांति है। दर्द से भागने की बजाय इसे स्वीकार करना चाहिए,क्योंकि यह मनुष्य को समग्र रूप से मजबूत करता है। इसलिए जीवन के हर कठिन से कठिन दौर में हार हमें नहीं मानना चाहिए। 2. आप बदलिए महात्मा गांधी जी,अम्बेडकर जी,अहिल्याबाई होलकर जी इत्यादि जितने भी महान चरित्र हुए है,उन्होंने सबसे पहले खुद को बदला,उसके बाद उन्होंने दुनिया को बदला। आज के सोशल मीडिया के दौर में लोग दूसरे के जीवन में क्या हो रहा हैं? यह पहले देखते हैं और टिप्पणी करते हैं। स्वयं का मन शुद्ध नहीं है लेकिन दूसरों के मन को शुद्ध करना चाहते हैं,आज के लोग। आज के समय में साधन अनेक है लेकिन लोगों के मन में संकल्प एवं नहीं हैं खुद को बदलने की।अब आप सोच रहेंगे होंगे कि क्या – क्या बदलना होगा? आज के युवा स्वयं को बाहरी रूप से बदल लेते है ( नए – नए कपड़े,हेयर स्टाइल इत्यादि) लेकिन वे खुद को आंतरिक रूप से ( विचारों से ,आदतों से इत्यादि ) बदल नहीं पा रहे हैं। आज इस निबंध का शीर्षक है – " आप बदलिए तो दुनिया बदलेगी " 1. सोच: आज का वातावण टॉक्सिक बन रहा है।आज के लोग अपने मन में ऐसे –ऐसे विचारों को स्थान दे रहे हैं,जिसकी वजह से उनका सोच नेगेटिव हो रहा है।यही कारण है कि आज हमारे देश में रेप,मर्डर, फ्रॉड इत्यादि दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहा है।युवाओं को सबसे पहले अपने विचारों को सकारात्मक रूप देना चाहिए।जो हम सोचते वहीं हम करते हैं।जब सोच बदलेगी,तब कार्य बदलेगा और कार्य बदलेगा तब यह देश का वातावण बदलेगा।इसलिए हमें अपनी सोच को सकारात्मक एवं रचनात्मक बनाना होगा।अच्छे लोगों को सुनना होगा,अच्छे वीडियोस एवं अच्छे लोगों के साथ हमें रहना चाहिए।जिससे नकारात्मकता,संदेह एवं निराशा दूर हो सकता एवं हमें आशावादी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। 2. बढ़ाएं: अगर आप भी अपने समाज में बदलाव लाना चाहते हैं? तब आपको सबसे पहले खुद को समझना आवश्यक है।आप क्यों बदलाव लाना चाहते हैं? कैसे बदलाव लाना चाहते हैं? आपकी का भूमिका होगी इत्यादि? खुद को समझना एवं कमियों को पहचानना पहला कदम है। 3.आदत: अच्छी आदतें जीवन को समृद्ध बनाती है और बुरी आदतें जीवन को नष्ट कर देती है।अपनी आदतों का विश्लेषण करें एवं बुरी आदतों के स्थान पर अच्छी आदतों को ग्रहण करें।जैसे :अनुशासन,ईमानदारी, मेहनत इत्यादि।यह आदतें आपके जीवन के साथ परिवार,समाज इत्यादि पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है। स्वयं को सकारात्मक रूप से बदलना अनिवार्य है।स्वयं को मजबूत बनाएं बिना हम अन्य को मजबूत बनने की सलाह सही रूप से नहीं दे पाएंगे,इसलिए आप बदलिए तो दुनिया बदलेगी। आशा करती हूं कि यह दोनों निबंध आपको अच्छा होगा। धन्यवाद काजल साह

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